मेहनत का फल

मेहनत का फल


निधि एक होनहार लड़की थी वो जितनी पढ़ाई में अच्छी थी उतनी हर काम में होसियार थी अभी 10 की परीक्षा दी और रिज़ल्ट आने वाला था।

निधि का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था बमुश्किल से उसके पिता उसे पढ़ा रहे थे घर की हालत इतनी अच्छी नहीं थी कि वो निधि को आगे पढ़ा सकते थे।

निधि का रिजल्ट भी आ गया था और हर बार की तरह वो अच्छे नंबरों से पास हो गई थी । पर जैसा घर की हालत ठीक नहीं होने के कारण अब पिता ने भी आगे पढ़ाने से इंकार कर दिया था ।

अनोखा विवाह

निधि की दादी भी निधि के पिता को अब जल्दी निधि के पीले हाथ कराने की बात कही । पर मा तो मा होती है वो अभी अपनी बेटी की शादी नहीं करवाना चाहती थी।

कुछ दिनों से निधि भी अब स्कूल नहीं जा रही थी तो उसकी अध्यापिका निधि के घर आई और स्कूल ना आने का कारण पूछा तो उसके पीता ने कहा कि अब बिटिया बी हो गई है और जल्दी से इसकी शादी करवा के ससुराल भेज देंगे और आगे पढ़ाने कि मेरी हैसियत नहीं है।


ये सुन अध्यापिका ने कहा कि अभी उसकी उम्र शादी लायक नहीं हुई है और आप शादी करवाने की बात करते हो अगर आप शादी करते ही तो ये बालविवाह होगा और ये कानूनी अपराध है। इसके लिए आपको सजा भी हो सकती है।

अच्छे संस्कार

निधि के पिता ने कहा मैडमजी अब क्या करे बिटिया बडी हो जाने के बाद लोग किस किस नजरिए से देखते है ये एक पिता ही जनता है और कई उंच नीच हो गई तो हम तो मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे।

अध्यापिका निधि के पिता को टोकते हुए कहती है तुम लोगो की परवाह क्यों करते हो लोगो का काम तो यही होता है और निधि एक होनहार विधार्थी है अगर तुम नहीं पढ़ा सकते तो में उसे शहर के अच्छे स्कूल में एडमिशन दिलवा देती हूं।

मैडमजी की बात सुन निधि के पिता सोच में पड़ गए मैडमजी ने फिर कहा कि कोन पिता नहीं चाहता कि उसकी औलाद पढ़ लिख कर इस काबिल बने की वो खुद के पैरो पर खड़े हो सके।

वर्षो की तपस्या का फल

मैडमजी की ये बात सन कर निधि के पिता ने शहर भेजने के लिए हामी भर दी। दूसरे दिन निधि और मैडमजी शहर जाने को तैयार हो गए ।

निधि भी खुश थी कि वो आगे पढ़ाई करेगी और शहर भी देखने को मिलेगा वो अपने मा बाबूजी का आशीर्वाद लेकर शहर को रवाना हो गए।

शाम तक दोनों शहर पहुंच चुके थे मैडमजी निधि को अपने घर ले गई दूसरे दिन स्कूल में एडमिशन और  हॉस्टल में उसके रहने का इंतजाम कर दिया।

फिर तो निधि बहुत खुश थी उसने अपने मैडमजी का धन्यवाद किया और उनके पैर चुए। मैडमजी को निधि पर पूरा भरोसा था कि उसकी मेहनत का फल उसे एक दिन जरूर मिलेगा।

समाज की जिम्मेदारी

मैडम उसकी आशीर्वाद देकर वापस गांव चली आई उधर निधि पूरी मेहनत और लगन से पढ़ाई करने लगी वहा पर उसके बहुत सारे दोस्त भी बन गए थे।

निधि पढ़ाई को लेकर बहुत सीरियस थी वो हमेशा किताबो में ही खोई रहती उसने भी ठान लिया था कि उसे कुछ बन कर ही जाना है। 

धीरे धीरे समय निकलता गया और वो सीढ़ी दर सीढ़ी उपर चढ रही थी वो दिन भी अब दूर नहीं था जब वो कुछ बन कर और अपने माता पीता का नाम रोशन करेंगी।

और कुछ दिन बाद उसका रिज़ल्ट भी आ गया और उसे अच्छी जॉब लग गई थी आज उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था गांव में भी खुशी का माहौल था।

नमकीन कॉफ़ी प्रेम की

अपनी बेटी कि इस तरह कामयाब होते देख उसके माता पिता फुले नहीं समा रहे थे और मैडमजी का धन्यवाद करते है अगर मैडमजी ना होती तो एक बेटी के सपने आज पूरे नहीं होते और आज वो कहीं एक दरिद्र जिंदगी गुजारती ।

आज निधि भी बहुत खुश थी अपने सपनों को हकीकत बन कर देखते हुए आज उसे भी उसकी मेहनत का फल मिल गया था ।

निधि जैसी आज भी कई ऐसी लड़कियां है जिसे मैडमजी जैसी साथ देने वाली नहीं मिलती और वो अपनी जिंदगी चूल्हे चोखे में पूरी कर देती है। और उन्हें उनकी मेहनत का फल नहीं मिलता है।

चांदनी का खौफ

भारत देश में आज भी कई गांव में लड़कियों की शादी बहुत जलदी कर देते है जिससे उनकी पढ़ाई बीच में ही चोड़नी पड़ती है। और उनका बालविवाह करा दिया जाता है।

तो दोस्तो आज की कहानी अपको किसी लगी कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा और अपने दोस्तो के साथ शेयर भी करिएगा।

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां