परवरिश

    परवरिश

जब रमेश 15 साल का था तब उसके सर से मा और पिता का छाया उठ चुका था। इतनी छोटी उम्र में वक़्त ने उसके कंधे पर बहुत भारी बोझ डाल दिया था।

रमेश के एक छोटा भाई नरेन्द्र और एक छोटी बहन आरती थी जब माता पीता का देहांत हुआ तब उनकी उम्र 9और 7साल थी।

लाली एक मासूम की कहानी

फिर भी रमेश ने हार नहीं मानी और अपने छोटे भाई बहन की परवरिश अच्छे से करने लगा। खुद भूखा सो जाता पर अपने भाई बहन को खाना देता खुद सर्दी कि रातो में बिना चादर के रहता पर अपने भाई बहन को चादर में रखता था ।

रमेश ने अपने भाई बहन को पढ़ा लिखा के इस काबिल बना दिया था कि वो अपने पैरो पर खड़े हो सके। नरेंद्र को एक अच्छी कंपनी में जॉब लग गई वो बाहर शहर में रहने लगा।

एक दिन अचानक नरेंद्र किसी लड़की को लेकर घर आता है गले में दोनों के वरमाला होती है ये देख रमेश चोंक जाता है और नरेंद्र को  इसके बारे ने पूछता है । नरेंद्र का जवाब होता है कि भैया ये नेहा है और मेरे साथ जॉब करती है हम साथ में ही पढ़ते थे और एक दूसरे से प्यार करते थे तो आज हमने शादी कर ली।

परिणाम

फिर भी रमेश कुछ नहीं कहता और आरती को आवाज़ देता है आरती अंदर से बाहर आती है रमेश कहता है जाओ और आरती की थाली लेकर आओ ।

लेकिन तभी नरेंद्र कहता है नहीं भैया इसकी कोई जरूरत नहीं है हम बस आपको बताने आए थे और अब में और नेहा दोनों दूसरे घर में रहेंगे मुझे ऐसी जिंदगी नहीं जीनी है।


रमेश नरेंद्र की ये बात सन कर बहुत दुखी होता है और कहता है छोटे तेरी परवरिश में मुझसे कोई कमी रह गई किया अगर कमी रह गई तो बता मुझे में पूरी करूंगा।

आनंदी

तभी नरेंद्र कहता है आप कमी कि बात करते हो आज तक आपने किया हि किया है ये गरीबी वाली जिंदगी ये झोपड़ पट्टी अब बस में इस घर में एक पल भी नहीं रुक सकता हूं।

मुझे ऐसी जिंदगी नहीं जीनी में ऐशो आराम की जिंदगी जीना चाहता हूं इतना कह कर नरेंद्र और नेहा वहा से चले जाते है।

नरेंद्र की बाते सुनकर रमेश कि आंखो में आंसू आ जाते है और वो सोचने लग जाता है कि बचपन से लेकर अब तक मैने कभी कोई कमी नहीं आने दी फिर भी आज ऐसा दिन देखने को मिला।


वो अपनी किस्मत को कोश रहा था और भगवान से पूछ रहा था कि मेरी परवरिश में कोनसी कमी रह गई जो आज ये दिन देखने को मिला।

कागज का विमान

रमेश रोते रोते वहीं पर बैठ गया भाई की ये हालत देख आरती भी रोने लग गई वो अपने भाई के पास आकर उन्हें चुप करवाने लगी रमेश ने रोते रोते आरती से पूछा कि मेरी परवरिश में क्या कोई कमी रह गई है आरती ने रोते रोते कहा नई भैया आपकी परवरिश में कोई कमी नहीं रही।


दोनों ने एक दूसरे को खाना खिलाया और दोनों जाकर सो गए रमेश अब तनाव में रहने लगा उसे हर पल नरेंद्र की ही बाते याद आती रहती थी।

 समय बीतता गया अब रमेश नरेंद्र की बातो से उबर चुका था अब बस उसको एक ही चिंता थी और वो थी आरती की शादी वो जल्द से जल्द आरती के हाथ पीले करना चाहता था।

सावन का सोमवार

वो आरती के लिए अच्छा रिश्ता ढूंढने लगा और एक अच्छा रिश्ता मिल गया लड़का कंपनी में था और अच्छी तनख्वाह कमाता था। पर लड़के के पिता दहेज बहुत मांग रहे थे।


रमेश ने सोचा गांव की जमीन बेच कर और ये घर बेच कर दहेज दे दूंगा रिश्ता अच्छा होने के कारण रमेश इसे हाथो से जाने नहीं देना चाहता था और वो ये रिश्ता पक्का कर लेता है।


जब ये बात आरती को पता चलती है तो वो बहुत रोती है और सोचती है कि भैया ने मेरी खुशि के लिए सब कुछ बेचने वाले है आरती को ये बात पसंद नहीं आई और उसने उस लड़के को फोन करके सब बता दिया।

धरती की रचना

इधर आरती ने अपने भाई को गांव की जमीन और घर बेचने से मना कर दिया रमेश ने आरती को बहुत समझाया पर वो नहीं समझी ।


बारात भी आ गई थी अब रमेश को भी चिंता सताने लगी कि कई दरवाजे से बारात खाली ना लोट जाए । लड़के के पिता घर में आए और दहेज की बात कि पर रमेश ने दहेज की मांग पूरी ना कर सकने की बात कही।

तभी गुस्से में लड़के के पिता ने बारात को वापस चलने को कहा तभी लड़के ने कहा कि ये बारात वापस नहीं जाएगी और जाएगी तो दुल्हन को लेकर और लड़के ने अपने पिता से कहा कि आप मुझे दहेज लेकर बेचना चाहते हो।

पर में ऐसा नहीं होने दूंगा लड़के ने रमेश को कहा आप चिंता ना करे में आपकी बहन से शादी करूंगा मुझे आरती ने सब कुछ पहले से ही बता दिया था।

पापा कहने वाली एक परी

ये सुन रमेश कि आंखो में खुशि के आंसू आते है और वो खुशि खुशी अपनी बहन का कन्यादान करते है और शादी के बाद उसको गले लगा कर कहता है कि मेरी परवरिश बेकार नहीं गई और ये है मेरी परवरिश जिसने अपने भाई का सर झुकने नहीं दिया।

फिर रमेश अपने बहन को विदा करता है और चैन की सांस लेता है आज उसके कंधो से बोझ उतर गया था और उसने अपना फ़र्ज़ पूरा कर लिया था।

तो दोस्तो ये थी आज की कहानी हमारी आपको किसी लगी अगर अच्छी लगी तो जरूर कमेंट करे और दोस्तो के साथ शेयर करे।



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