दहेज

दहेज

मालिनी सुबह से ही काम में लगी हुई थी । उसका छोटा बच्चा विक्रम भी रोए जा रहा था । उपर से सास कि किस्किस बेचारी ने थोड़ी देर विक्रम को गोद में लेकर दूध पीला दिया तो क्या हो गया था । सास ने खरी खोटी सुना दी।


वो वापस विक्रम को सुला कर काम में लग गई । तभी सास कि आवाज़ आई कहा मर गई । यहां सफाई कोन करेगा तेरी मा सारे दिन बैठी रहती है कुछ काम नहीं करती है। मालिनी जट से गई और सफाई कर दी।

मेरी प्रतिभा

मालिनी एक गरीब परिवार से थी। इस कारण उसकी सास हमेशा दहेज को लेकर ताने मारती रहती थी। फिर भी वो कभी इसका विरोध नहीं करती सब कुछ सहन करती थी।

मालिनी की ननद सुप्रिया भी कम नहीं थी वो भी आग में घी डालने का काम करती थी। वो भी अपनी भाभी की हमेशा प्रताड़ित करती रहती थी।

फिर भी मालिनी सब कुछ सहन कर जाती थी। मालिनी के पति सुरेश एक अच्छे इंसान थे इसीलिए तो मालिनी उस घर में रुकी हुई थी और सब सहन करती थी।

संघर्ष

सुरेश एक कंपनी में काम करते थे और वो भी मालिनी को समझाते की मा की बातो को दिल पे ना ले।

पर मालिनी कि सास और उसकी ननद तो उसकी बुराई किए नहीं थकती थी। हद तो तब हो गई जब सुप्रिया ने मालिनी कि साड़ी जला दी।

उस दिन मालिनी बहुत रोई और सुरेश जब घर आया तब सब बात बता दी । सुरेश ने जब अपनी मा को ये बात कही तो मा ने उल्टा सुरेश की ही बोलना चालू कर दिया । बीवी का गुलाम पत्नी जी कहती है मां लेता है । मा की तो सुनता है नहीं सुरेश भी अब तो परेशान हो गया था।

चापलूस मंडली

एक दिन मलिनिं के पिता मोहनलाल जी मालिनी से मिलने आए सुरेश तो घर पर था नहीं और मालिनी भी काम में लगी हुई थी।

आदर सत्कार तो दूर की बात उन्हें पानी का भी नहीं पूछा गया  ये देख मोहन लालजी बहुत दुखी हुए । तभी मालिनी अंदर से आई और अपने पिता कि देख बहुत खुश हुई और उनका आशीर्वाद लिया।

मोहनलाल जी भी अपनी बेटी के आंखो में आंसू देख समझ गए कि मेरी बेटी बहुत दुखी है । मोहनलाल जी ने मालिनी को अपने साथ घर चलने को बोला पर मालिनी ने ये कह कर मना कर दिया कि मेरा घर तो यही है। और मालिनी ने रोते रोते कहा बापू आप ही कहते थे ना की बेटी तो पराया धन होती है।

अनोखा विवाह

मालिनी ने अपने पिता से ये भी कहा कि पिताजी ने यहां पर बहुत खुश हूं आप चिंता न करे आपकी बेटी आपका सर कभी झुकने नहीं देगी।

मोहनलाल जी ने मालिनी के सर पर हाथ रखा और कहा कि मेरी बेटी मुझे नाज़ है तुझ पर आज मालिनी कि बाते सन मोहनलाल जी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया था।

अपने नातिन के साथ खेल कर वो कुछ समय पश्चात वहा से चले गए । उनके जाने के बाद मालिनी बहुत रोई। कुछ दिन बाद वापस सुप्रिया और मालिनी कि सास ने मालिनी से झगड़ा किया और दहेज के बारे में बोला।

पांखी

मालिनी की सास ने कहा कि तेरे बाप ने एक रुपया तेरी शादी में नहीं दिया ये तो मेरे बेटे कि किस्मत फूटी थी जो हमे तुम जैसे भिखारियों के घर शादी करनी पड़ी।

मालिनी के पिता मोहनलाल जी ने शादी के वक़्त गहने दिए थे वो तो मालिनी के घर आते ही कुछ दिनों बाद उसकी सास ने ले लिए थे।

अब कभी भी झगड़ा होता है तो वो दहेज का ही ताने मारती है और ताने भी ऐसे ऐसे की मालिनी की जीने की चाह भी नहीं रहती है। आज भी मालिनी वो दुख भारी जिंदगी जी रही है।

सांवली

पता नहीं मालिनी कि ये दुख भरी जिंदगी का अंत कब होगा और उसकी जिंदगी में खुशियों के क्षण कब आएंगे।

आज भी कई ऐसी मालिनी जैसी औरते और लड़कियां है जो अपने पिता के घर से विदा होते समय ये ही सोचती है कि इस घर में जाएगी वहा भी खुशि से रहेगी पर ऐसा नहीं होता कई ऐसी औरते है को दहेज के नाम पर प्रताड़ित होती रहती है।

और उनकी खुशियों का दमन होता रहता है बहू भी एक बेटी ही होती है और सास भी एक मा होती है मेरी एक ही विनती है बहू को अपनी बेटी समझें और सास को अपनी मा तभी ये घर के झगडे मिटेंगे वरना कभी नहीं।

तो दोस्तो आज की कहानी आपको कैसी लगी कमेंट में अपनी राय अवश्य दे और अपने मित्रो के साथ जरूर शेयर करे।
 

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