संघर्ष कि दीवार


नमस्कार दोस्तो,
रेखा की शादी को 3 महीना ही हुआ था कि उसके पति सौरभ कि दुर्घटना में मौत हो गई । अभी बेचारी की हाथ कि मेहंदी भी सुखी नहीं थी कि उसकी चूड़ियां टूटने की बारी आ गई थी।

संघर्ष कि दीवार

सौरभ की मौत के बाद जो लोग उसको पहले बेटी कि तरह रखते आज वहीं लोग उसे चुड़ैल समजते थे आये दिन रेखा को उसकी सास ताने मारती और कहती कि मेरे बेटे को आते ही तू खा गई।

एक दिन ऐसे ही घर में रेखा की सास ने उसको बोलना चालू कर दिया कि करमजली मेरी बेटे की जगह तू क्यों नहीं मर गई। मेरे बेटे को तो तू खा गई अब क्या सबको खा जाएगी कई डूब के मार क्यों नहीं जाती।

इतना सुनते ही रेखा अपने कपड़ों से भरा बैग लेकर जैसे ही घर से जाने लगी उसकी एक दम से चक्कर आ गए वो बेहोश हो गई। तभी रेखा का देवर अनिल आ गया वो रेखा को अस्पताल लेकर गया। डॉक्टर ने रेखा की नब्ज देखी तो पता चला कि वो मा बनने वाली है।

चापलूस मंडली

फिर जब वो होश में आई तो डॉक्टर ने रेखा से कहा कि आप मा बनने वाली है तो इस हालत में ऐसा कोई काम मत करना की आपके बच्चे को नुक़सान पहुंचे।

रेखा घर आई अनिल ने सबको बता दिया कि भाभी मा बनने वाली है तो रेखा की सास और आग बबूला हो गई और उसे कुलटा और उसके बच्चे को पाप की गठरी कहा । तो अनिल ने अपनी मा को समझाया कि मा आप ये क्या बोल रही हो। भाभी की हालत खराब है और उल्टा आप उसे ऐसे बात कार रही हो।

फिर रेखा की सास ने कहा कि आते हि सबके उपर जादू कर दिया अब अनिल भी उसका पक्ष ले रहा है रेखा इतना सुनते ही अपना बैग उठाया और अपने मायके चली गई।

मा के पैरो का दर्द भाग 2

मायके वाले भी पुरानी परम्परा वाले थे उन्होंने भी रेखा को बोल दिया कि एक बार घर से जब बेटी की विदाई हो जाती है तो फिर वो मायके में नहीं रह सकती है।

अब तो रेखा ने भी ठान लिया की वो खुद अपने बच्चे की देखभाल और उसे अच्छी परवरिश देगी। वो वहा से भी चली जाती है और एक किराए के मकान में रहती है।

रेखा एक पढ़ी लिखी होने के कारण उसे एक कंपनी में जॉब मिल जाती है उसकी मकान मालकिन भी अच्छी थी।वो भी रेखा की देखभाल करती थी। रेखा के अब 9 वा महीना चल रहा था। फिर भी वो काम पर जाती तो कंपनी वालो ने उसे छुट्टी दे दी।

अतीत की यादे

रेखा ने एक दिन एक बच्ची को जन्म दिया वो बहुत खुश थी धीरे धीरे बची बड़ी होती गई रेखा उसका पूरा ध्यान रखती रेखा को अब किसी के भी सहारे की जरूरत नहीं थी।

रेखा की बच्ची अब 4 साल की हो गई थी उसको एक स्कूल में दाखिल करवा दिया धीरे धीरे समय बीतता गया उसकी बच्ची बड़ी हों गई थी।

उसने बोर्ड के एग्जाम ने टॉप किया तो रेखा फुली नहीं समा रही थी और अपनी बेटी पर नाज़ कर रही थी उसने अपनी बच्ची का नाम सुरभि रखा था रेखा सुरभि को डॉक्टर बनना चाहती थी ।

तनख्वाह salary

इसके लिए वो हर संघर्ष कि दीवार को तोड़ कर उसे आगे बढ़ाना चाहती थी रेखा का एक ही लक्ष्य था और वो था सुरभि को डॉक्टर बनाना और सुरभि भी अपनी मा के सपनों को पूरा करने की हरसंभव कोशिश करने में लगी हुई थी ।

और कुछ सालो बाद वो समय आ ही गया जब सुरभि एक डॉक्टर बन गई और उसी गानव के अस्पताल में उसकी जॉब लग गई ।

परीक्षा तो पूरी हो गई

आज रेखा अपने सपने को पूरा हुआ देख बहुत खुश थी पूरे गांव भर में उसने मिठाई बटवाई और हर घर जाकर बोला कि मेरी बेटी सुरभि डोस्टर बन गई ।

अब धीरे धीरे रेखा और सुरभि ने खुद का एक मकान के लिया और दोनों आराम से रहने लगे। एक दिन रेखा की फोन की घंटी बजती है किसी अनजान नंबर लग रहा था जैसे ही उठाया और हैलो बोला आगे से एक जनी मानी आवाज़ सुनाई दी।

वो आवाज़ अनिल की थी अनिल ने रेखा के हाल चाल पूछे और बताया कि मा बहुत बीमार है और अंतिम सांसे ले रही है। इतना सुनते ही सुरभि को अपने साथ ले वो अपने ससुराल चली गई।

पापा कहने वाली एक परी

ससुराल पहुंच कार देखा तो सास ने बिस्तर पकड़ रखा था रेखा अपनी सास के पास जाकर बैठ गई और उनका हाल पूछा तो उसकी सास ने हाथ जोड़ कार रेखा से माफी मांगी और कहा जो भी मुझसे भुल हुई है उसके लिए मुझे माफ कर दे और उसकी सास रोने लगी।

रेखा ने अपनी सास के हाथ पकड़ कार कहा आप माफी मत मंगिए जो होना था वो हो गया और आप मेरी मा हों रेखा ने सुरभि की अपने पास बुलाया और कहा कि ये तेरी दादी है पैर चुओ इनके सुरभि ने अपनी दादी के पैर छुए और दादी ने भी सुरभि को गले लगा दिया।

सुरभि एक डॉक्टर थी तो उसने अपनी दादी को चेक किया और अच्छी सी दवाई दी जिससे थोड़े ही दिनों में उसकी दादी एक दम से ठीक हो गई ।

अनजान रिश्ता

रेखा की सास ने अपनी बहू पर गर्व करते हुए कहा कि रेखा तू एक सच्ची पत्नी और मा है जिसने सारी संगर्श की दीवारों को तोड़ दिया और अपनी बेटी को डॉक्टर बनाया।

अब सारा परिवार साथ रहने लगा और हसी खुशियों दिन बीतने लगे।

तो दोस्तो आपको कहानी कैसी लगी अच्छी लगी तो कमेंट करे और शेयर भी करे।

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां