मा के पैरो का दर्द भाग 2



नमस्कार दोस्तो,

आपको स्वागत है आपके अपने ब्लॉग अच्छी सोच में तो दोस्तो आज की कहानी मा के पैरो का दर्द का दूसरा भाग तो चलिए चलते है कहानी की और

मा के पैरो का दर्द

सुबह हो चुकी थी मा के करहाने की आवाज़ आ रही थी। में भी उठ कार मा के पास चला गया और देखा आज मा के पैरो का दर्द ज्यादा ही हो चुका था।

अतीत की यादें

अस्पताल की दवाई भी बेअसर हो गई थी, मा से पीड़ा सहन नहीं हो पा रही थी। पापा घर आए और उन्होंने मा को कोई हड्डियों के वेध के पास ले जाने की बात कही।

और उन्होंने हमारे चाचा का लड़का जो रिक्शा चलता था। उस बुला दिया। तब तक में भी नहा कर तेयार हो गया चाचा का लड़का रमेश आ गया था।



अब मा को रिक्शे में बिठाना था, मा से तो उठ कर खड़ा भी नहीं रहा जा रहा था। और चल भी नहीं पा रही थी रमेश और मैने मा को अपने हाथो पर उठा लिया और रिक्शे में बिठा दिया।

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फिर हम भी रिक्शे में बैठ गए और वेध के पास चले गए वेध का घर ज्यादा दूर नहीं था हम कुछ ही समय में वेध के घर पहुंच गए। घर पर वेधजी नहीं थे तो हम उनके दुकान पर चले गए वेढजी हमें वहां मिल गए।



वहां पहुंच कर रिक्शे को साइड में खड़ा किया और मैने और रमेश ने मा की अपने हाथो पर उठाया और दुकान  अंदर ले गए।


वैधजी ने मा को देखा और फर्श पर लेट जाने के लिए कहा मैने मा को फर्श पर लिटा दिया। बेधजी ने मा के पैर को पकड़ कर हड्डी को सही करने लगे। 

परीक्षा तो पूरी हो गई


मा के पैरो में असहनीय दर्द हो रहा था, इस असहनीय दर्द के कारण मा के आंखो से आंसू बह रहे था और दर्द से कराह रही थी। उनकी ये पीड़ा मुझसे भी देखी नहीं जा रही थी।


वेधजि ने 20 मिनिट तक पैर की हड्डी को देखा पर उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था। और मा की पीड़ा और भी बढ़ गई थी।।।


मा अपने पैर में होने वाले दर्द को सहन नहीं कर पा रही थी और लगातार कराह रही थी फिर मा ने भी कह दिया कि अब मुझसे दर्द बर्दाश्त नहीं होगा। मुझे घर के चलो में घर जाना चाहती हूं।

मा के पैरो का दर्द

असहनीय दर्द के कारण मा की हालत खराब हो रही थी और उनकी चक्कर आ रहे थे, मुझसे भी मा की ये हालत देखी नहीं जा रही थी। पर अब मा की हड्डी भी सही करवानी थी अगर हड्डी सही नहीं होगी पैर की तो मा चल कैसे पाएगी।



और मा को जीवन भर बिस्तर में गुजरना पड़ेगा और में ये कभी नहीं चाहता की मा बिस्तर पकड़ के क्युकी जो एक बार बिस्तर पकड़ लेता है वो कभी वापस नहीं उठता इससे पहले भी एक किस्सा हमारे परिवार में हो चुका है।


हमारे ताऊजी के लड़के जिनका नाम चंदनमल है उनके साथ भी ऐशा हि हुआ था उनके कमर की नाडी दब गई थी और उनसे भी चला नहीं जाता और  रहते उनका ऑपरेशन नहीं करवाया तो वो भी बिस्तर पकड़ लिया और 3 साल बाद उनका देहांत हो गया।

शतरंज की अधूरी बाजी


वो गलती में अपनी मा के साथ नहीं दोहराना चाहता था में उन्हें किसी भी हाल ने ठीक करना चाहता हूं, पर आज मा का असहनीय दर्द और हिम्मत हार जाने के कारण हम वापस घर आ गए थे।


मा ने भले ही हिम्मत हार ली पर में हिम्मत नहीं हरूंगा उन्हें ठीक करवा के हि बैठूंगा मैने भी ये ठान लिया था।घर के आगे रिक्शे को रोका और रमेश और मैने मा को अपने हाथो में उठाया और अंदर बिस्तर पर लिटा दिया।

पापा की नन्ही परी

वैधजी ने कहा था कि अगर ठीक नहीं होगा तो कल में आपके घर आ जाऊंगा और ठीक कर दूंगा। में तो भगवान से यही दुआ करता हूं कि मेरी मा जल्दी अपने पैरो पर चल सके।

तो दोस्तो ये थी आज की हमारी कहानी आपको कैसी लगी अगर अच्छी लगी तो कमेंट करे और शेयर करे।

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