अतीत की यादें

अतीत की यादें

नमस्कार दोस्तो ,

मेरे जूते कहा है रेणु मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही है बाहर से कमलेश ने आवाज़ दी रेणु को रेणु अरे यही तो थे में आती हूं अभी रेणु भागती भागती बाहर आई और कमलेश को जूते दिए।

कमलेश ने जूते पहने और बाहर गाड़ी की तरफ जाने लगा तभी रेणु ने आवाज़ दी अजी सुनते हो नाश्ता तो करते जाइए। कमलेश ने बोला नहीं नहीं मुझे पहले से ही लेट हो गया है में चलता हूं।

तनख्वाह

कमलेश चला गया रेणु घर के अंदर आई और काम में लग गई । तभी रेणु का 5 साल का बेटा आया और मा को कहने लगा मा मा अबकी बार हम कहा घूमने जाएंगे। रेणु बोली बेटा वो तो तेरे पापा को पता होगा। जहा लेकर जाएंगे वहा चले जाएंगे।

कमलेश की फैमिली में तीन ही सदस्य थे कमलेश रेणु और उसका बेटा नवीन था कमलेश के एक  अच्छी जॉब थी शाम को जब कमलेश घर आया तो नवीन भाग कर कमलेश के पास गया और कहा पापा पापा अबकी बार गुमने कहा जाना है।

कमलेश ने कहा बेटा जहा आप बोलोगे वहा चलेंगे तो नवीन ने अचानक से हरकपुर का नाम लिया। कमलेश ने हराकपुर का नाम सुनते ही अपने अतीत में चला गया।

परीक्षा तो पूरी हो गई

तभी वापस आवाज़ आई चलो खाना खालो रेणु ने आवाज़ दी थी कि कमलेश अपनी अतीत कि यादों से बाहर आ गया । फिर सबने मिल कर खाना खाया और सोने के लिए चले गए।

पर कमलेश के दिमाग में वही बात घूम रही थी वो वापस उसी यादों में घूम हो रहा था। क्युकी हरकपुर से कमलेश की याद जुड़ी थी कमलेश ने अपने बचपन के दिन वही गुजारे थे।

कमलेश का जन्मस्थल भी हारकपुर था उसको वो सब याद आ रहा था वो खेत खलिहान वो गांव की गलियों को दोस्तो के साथ खेलना पूरे गांव में घूमना। सभी एक छवि  कर चेहरे के सामने घूम रहे थे।

मा के पैरो का दर्द

अतीत की यादों को याद करते करते कब नींद आ गई पता ही नहीं चला सुबह हो गई 9 बज रहे थे रेणु ने आवाज़ दी कमलेश चलो उठ जाओ ऑफिस नहीं जाना किया। कमलेश ने सुस्ताते हुए बोला आज तो रविवार है रेणु बोली में भी किसी भुलक्कड़ हूं कुछ याद भी नहीं रहता तभी कमलेश बोला जाओ तुम तैयार हो जाओ आज हम घूमने चलते है ।

रेणु ने आश्चर्य से पूछा कहा कमलेश ने कहा हराकपुर रेणु भी खुश हो गई क्युकी हरकपुर रेणु का ससुराल था। और बहुत समय ही गया था। हारकपुर गए हुए। रेणु अंदर जा कर तेयारिया करने लगी और कमलेश भी तेयार होने लगा उसका बेटा नवीन भी तेयार हो चुका था।

सब तयारी हो चुकी थी रेणु नवीन दोनों कार की पीछे वाली सीट पर बैठ गए और कमलेश कार को चला रहा था। सफर लंबा था तो कमलेश यही सोच रहा था की मेरा गांव अब कैसा होगा।

अनोखा विवाह

कमलेश वापस अपने अतीत की यादों में चला गया और बचपन के दिन याद करने लगा वो मा का प्यार वो दुलार पिता की प्यार भरी डांट ये याद करते करते उसकी आंखो में आंसू आ गए थे। क्यों की कमलेश के माता पिता इस दुनिया में नहीं थे।

गांव में कमलेश के माता पिता का घर और जमीन थी जिसको उसके काका संभालते थे। माता पिता की याद को ताजा रखने के लिए कमलेश ने गांव में जो घर था उसे बेच नहीं था।

वापस अतीत की यादों से निकल कर रेणु के साथ गांव की बाते करने लगा। काफी समय हो गया था कार में चलते चलते अभी हरेकपु आने ही वाला था ।

पापा कहने वाली एक परी

कुछ ही देर में हराजपुर अा गया था। कमलेश ने कार को रोका और कार से उतरकर देखा तो पता चला उसका बचपन कहीं गुम हो गया था।

क्युकी जहा कच्ची सड़के थी वहां पक्की सड़के बन चुकी थी जहा मैदान थे वहां उसी उसी इमारतें थी। जहा वो खेला करता था वहां फैक्ट्री बन चुकी थी।

अतीत की सब यादे ऐशा लग रहा थी की इन इमारतों के नीचे दब सी गई थी जो उसने बचपन यह बिताया था वो अब नहीं मिल रहा था। उसको वो शांति नहीं मिल रही थी जो उसने बचपन में यहां देखी थी।

अच्छे संस्कार

कमलेश वापस अपनी कार में बैठ गया और अपने शहर की तरफ रुख कर लिया। वो अपने मन को समझा रहा था कि ये वो गांव नहीं जहा उसने अपना बचपन बिताया शायद वो रास्ता भटक गया है। वो अपने शहर की तरफ कार को ले गया।

तो दोस्तो ये थी आज की हमारी कहानी आपको किसी लगी अच्छी लगी तो कमेंट शेयर जरुर करे।

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