तनख्वाह ( salary)

तनख्वाह ( salary )

नमस्कार दोस्तो,
ये कहानी आज से कुछ सालो पहले कि है जब रोहित गांव से शहर कमाने के लिए गया। गांव में कोई फैक्ट्री या कंपनी नहीं होने के कारण उसे कोई ढ़ंग का काम भी नहीं मिलता एक पढ़ा लिखा होने के साथ वो बहुत मेहनती भी था।

उस गांव में अगर काम भी मिलता तो उसे इतनी तनख्वाह नहीं मिलती जिससे उसके घर का भी खर्च निकाल सके।
वो कहते है ना कि आमदनी अठनी और खर्चा रुपया वाली बात थी।

घर में उसके माता पिता और एक बड़ा भाई जो कि अलग रहता था उसके परिवार में भी उसके तीन बच्चे और उसकी पत्नी थी। वो भी अपना खर्चा मुश्किल से चला पाता था।

रोहित के पिता एक चोटी सी दुकान में थोड़ा बहुत सामान लेकर बैठे रहते और अपना घर का गुजारा चलाते थे। मा गृहिणी थी ।

परीक्षा पूरी हो गई

रोहित की भी शादी हो चुकी थी उसके साथ भी उसकी पत्नी थी । काम ढंग का ना मिलने के कारण उसे बड़ी महानगरी में जाना पड़ा।

शुरुआत में थोड़े दिन काम ना मिला पर उसे जल्दी ही काम मिल गया एक फैक्टरी में वो फैक्टरी थी एक लेडीज कुर्ती गारमेंट पर प्रेस और उसकी पैकिंग होती थी।

शुरुआत में रोहित को पैकिंग में रख लिया और उसकी तनख्वाह 7000 थी। फिर भी उसने हिम्मत नहीं चोड़ी वो 7000 में भी अपना घर खर्चा चलाता था।

अनोखा विवाह

रोहित का सेठ भी अच्छा था क्युकी कभी कभी रोहित के लिए भी अपने घर से खाना लाता और रोहित भी पूरी मेहनत के साथ काम करता क्युकी आज कल मेहनती लडके मिलते ही कहा है। इस कारण उसका सेठ भी उसका ध्यान रखता था।

धीरे धीरे समय बित रहा था इधर रोहित की पत्नी भी एक दिन रोहित को बोला कि वो मा बनने वाली है तो रोहित बहुत खुश हो गया। पर उसके सिर पर चिंता कि लकीर भी थी वो सोच रहा था कि इतनी तनख्वाह में क्या होगा।

फिर भी वो रोज़ काम पर जाता और और अपना काम करता धीरे धीरे उसको अब काम करते करते 5 महीने हो गए थे ।

वर्षों की तपस्या का फल

एक दिन रात को वो घर आया और अपने सेठ को फोन लगा कर बोल दिया कि वो दीवाली के बाद अपने गांव लौट जाएगा। तो सेठ ने इसका कारण पूछा तो रोहित ने सब बात खुल के बता दी कि इतनी सी तनख्वाह में उसका गुजारा नहीं होता और उसकी पत्नी भी गर्भवती है।

फिर रोहित ने बोला कि आप अगर मुझे प्रेस में लगा दी तो में यहां रुक जाऊं। सेठ ने ये बात सुनते ही हा बोल दिया और बोलता भी क्यों नहीं क्युकी रोहित एक पढ़ा लिखा और मेहनती जो था। ऐसे ईमानदार लोग मिलते कहा है आज कल फिर बात पूरी हो गई।

फिर दीवाली आने ही वाली थी। इसलिए रोहित भी अपना हिसाब लेकर अपने गांव दीवाली मनाने आ गया और कुछ दिन रुक कर वापस दीवाली के बाद उसी महानगरी में चला गया।

अच्छे संस्कार

पहला दिन था जैसे ही वो फैक्टरी पहुंचा उसके सेठ ने उसके प्रेस हाथ में दे दी और बोले रोहित आज से ये प्रेस तू चलाना रोहित भी बहुत खुश था।

फिर वो रोज़ प्रेस ही चलाता पर शायद किस्मत को और ही मंज़ूर था। काम इतना मंदा हो गया कि प्रेस चलाता तो भी उसके महीने की तनख्वाह 8000 जैसी ही होती महीने में 10 दिन तो छुट्टी ही रहती थी।

बेचारा रोहित अपनी किस्मत को कोश रहा था उधर उसकी पत्नी भी गर्भवती थी फिर भी वो काम करता और काम ऐशा ही चलता लगातार 3 महीने तक काम ऐशा ही चला इससे परेशान होकर एक दिन रोहित ने सेठ को बोल दिया कि इतने में मेरा गुजरा भी चलता और मेरी पत्नी भी गर्भवती है इसलिए में अपने गांव चला जाऊंगा।

समाज की जिम्मेदारी

सेठ भी क्या बोलता क्युकी रोहित की बात भी सही थी तो सेठ भी इंकार नहीं कर सका और बोल दिया कोई बात नहीं जब काम चलेगा ने फोन करके बोल दूंगा।

फिर रोहित और उसकी पत्नी अपने गांव लौट आए और छोटा मोटा काम करके घर चलाते । दो महीने बाद उनके घर में एक लडकी का जन्म हुआ । रोहित बहुत खुश था और उसकी पत्नी भी खुश थी।

धीरे धीरे टाइम निकल रहा था दीवाली वापस आने वाली थी दीवाली भी मनाई और उसके थोड़े दिन बाद रोहित के सेठ का फोन आया कि रोहित अगर तुझे वहा काम ना मिला हो तो आजा यह अब अच्छा काम चल रहा है और भाव भी बढ़ा दिए है।

पांखी एक बेटी की कहानी

ये सुनते ही रोहित ने हा भर की और उनके सेठ को बोल दिया कि में आ जाऊंगा आप मेरे लिए कमरा कोई अच्छा देख लेना। फिर क्या था सेठ ने कमरा देख लिया और रोहित को बोल दिया ।

फिर दो दिन बाद रोहित और उसकी पत्नी और बच्ची चले गए वापस उसकी महानगरी में इस बार उनका कमरा उनकी फैक्ट्री से थोड़ा ही दूर था।

इससे रोहित को खाना खाने जाने में भी कोई दिक्कत नहीं और बच्ची का भी ध्यान रखता और अब उसका काम बहुत अच्छा चलता उसकी तनख्वाह भी अच्छी होती थी ।

चम्पा एक बेटी की दास्तां

उसकी बच्ची भी 18 महीने की हो गई थी और उसकी पत्नी वापस गर्भवती थी अबकी बार डिलीवरी वहीं पर करवाने का फैसला लिया। कुछ महीने बाद वापस रोहित के घर में लक्ष्मी आ गई । बच्ची हुई तो भी वो बहुत खुश था।

घर का खर्चा भी अच्छे से चलता और बचत भी हो जाती और अपनी बच्ची के लिए भी किसी बात की कमी नहीं रखता घर जब भी जाता तो सबके लिए कपड़े लेकर जाता। अबकी बार भी होली को आया था अपने गांव और शितलासप्टमी तक रुका और चला गया।

एक बार और रोहित की किस्मत खराब थी जाते ही उसकी छोटी वाली बच्ची बीमार पड़ गई उस दूसरे दिन ही अस्पताल लेकर गए तो डॉक्टर ने निमोनिया का असर बताया।

बेटी हो तो ऐसी

डॉक्टर बोले की इस अभी के अभी एडमिट करना पड़ेगा वरना कुछ भी हो सकता है। फिर भी रोहित ने बोला कि आप अभी कुछ दवाई लिख कर दे दो हम कल आएंगे।

दवाई लेकर रोहित और उसकी पत्नी घर आ गए रात के 9 बज रही थी खाना भी नहीं बना हुआ था। और इधर रोहित की पत्नी तो रही थी। उसकी बीमार बच्ची को देख कर फिर रोहित ने उसे समझाया और कहा कल हम दूसरे अस्पताल जाएंगे और बच्ची को दिखाएंगे।

फिर दूसरे दिन वो दूसरे अस्पताल गए तो वहा बच्ची को सिर्फ कफ जमा हुआ बताया। फिर तीसरे अस्पताल गए तो भी कफ का ही बोला फिर हमारी चिंता थोड़ी काम हुई।

एक लडकी सांवली

उसके दो दिन बाद है Corona virus  के कारण पूरा भारत लॉकडाउन हो गया । अब कोई काम भी नहीं था किराया भी घर का लग रहा था और ऊपर से इस बीमारी का टेंशन फिर भी रोहित ने दो महीने निकाले और लॉक डाउन ख़तम नहीं हुआ तो रोहित ने अपने सेठ को बोल दिया कि वो अब घर अपने गांव जाएगा।

फिर क्या था एक दिन रोहित के मोहल्ले में भी जहा वो रहता था वहा एक औरत को Corona    ki बीमारी हो गई रोहित ने परमिशन तो ले ली थी और कार भी कर ली थी।

तो वो सुबह ही अपने गांव के लिए निकल गए। और अपने घर पहुंच गए। आज भी रोहित अपने गांव में ही है और इंतजार कर रहा है कि कब वहा वापस से काम शुरू हो जाए । आज भी उसकी तनख्वाह उसकी बचत धीरे धीरे पूरी हो रही है।

स्नेहा एक किन्नर

तो दोस्तो आज की कहानी आपको कैसी लगी अच्छी लगी तो जरुर बताइएगा और शेयर भी करना।

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