पापा कहने वाली एक परी

नमस्कार दोस्तो,
दोस्त आज कि कहानी बहुत लाजवाब है हो भी क्यों न क्यों की ये कहानी है एक बाप और बेटी के प्यार की कहानी है। दोस्तो बाप और बेटी का रिश्ता बहुत प्यारा होता है एक बेटी ही जानती है अपने पापा की अहमियत क्यों की बचपन से लेकर जवानी तक हर वो मुराद जिसके लिए बेटी रोती है वो एक पिता ही पूरी कर सकता है। दोस्तो तो आज की ये वास्तविक कहानी आपके सामने शेयर कर रहा हूं अगर आपको अच्छी लगे तो एक कॉमेंट जरुर कर्येगा और शेयर करना ना भूले और हमारे ब्लॉग को सब्सक्राइब कर ले।

पापा कहने वाली एक परी

रात के 8 बजे थे खाना पीना हो गया था। मेरी पत्नी ने बोला सुनिए आज मेरे पेट में दर्द हो रहा है। ये सुनते ही मैने बोला हलका दर्द तो होगा ही तुम हिम्मत रखो।

मेरी पत्नी गर्भवती थी उसका 9 वा महीना भी पूरा हो गया था। रोज इतना दर्द तो होता ही था। आज ही सुबह में ओर मेरी पत्नी अस्पताल जाकर आए थे। डॉक्टर ने 2=3 दिन का समय दिया था डिलीवरी में तो मुझे इतनी चिंता नहीं थी।

अनजान रिश्ता

तो हम उस रात को सो गए। सुबह के 4 बजे थे कि अचानक रीना ने मुझे उठाया कि दर्द बहुत बढ़ गया है। में जाकर मेरी मा को उठाया तो वो बोली दर्द तो होगा ही सुबह तक देखते है अगर ज्यादा होगा तो अस्पताल लेकर चले जाएंगे।

में वापस आया और रीना को बोला थोड़ी देर सो जाओ सुबह होते ही चलते है वो बोली नींद नहीं आ रही है। मैने कहा ठीक है हम बाते करते इससे तुम्हारा मन बहल जाएगा।

बाते करते करते सुबह के 7 बज गई सर्दी के दिन थे तो अंधेरा अभी अभी दूर हुआ था। में बाहर गया और रिक्शा लेकर आ गया। रीना को पकड़ कर मैने रिक्शे में बिठाया। साथ में मेरी भाभी भी आईं हम तीनों अस्पताल चले गए।

मित्रता की कसौटी

वहा जाते ही डॉक्टर ने मेरी पत्नी रीना को एडमिट कर दिया मेरी भाभी मेरी पत्नी के साथ अंदर थी और में बाहर बेंच पर बैठा था और दुआ कर रहा था कि सब ठीक हो जाय।

क्युकी मुझे भी बहुत चिंता थी मेरी पत्नी रीना की क्युकी उसकी ये पहली डिलीवरी थी। डर भी लग रहा था। लोगो का आवागमन हो गया था अस्पताल में में घड़ी के सामने देखा 8:45 हो रही थी।

रीना को अंदर लेकर गए हुए 1:30 घंटा हो गया था। मेरी भाभी बाहर आई और बोली अभी समय है डिलीवरी में में बाहर गया और मेरे और भाभी के लिए चाय लेकर आया। हमने चाय पी और भाभी वापस अंदर चली गई।

अनोखा विवाह

में बेंच पर वापस बैठ गया। रूम से एक बच्चे कि किलकारी सुनाई देने लगी तो में खुश हो गया । फिर पता चला किसी दूसरी महिला के लड़का हुआ है। 

में वापस बेंच पर आकर बैठ गया। तब तक मेरे घर से मा पापा और बड़े भैया भी आ गए। आकर मुझसे पूछा क्या हुआ। मैने बोला अभी समय है।

वो भी मेरे पास बेंच पर बैठ गए। सब चुपचाप बैठे थे। बोले भी क्या सब को चिंता सता रही थी। में वहा से उठा और अस्पताल में इधर उधर टहल रहा था। की एक नर्स आईं और बाहर बैठे एक युवक को कहने लगी। की आपकी पत्नी का खून की मात्रा शरीर में बहुत कम है। तो आपको कई से खून का इंतजाम करना होगा।

वर्षो की तपस्या का फल

और अस्पताल में भी आपकी पत्नी के ग्रुप का खून नहीं है। वो युवक किसी दूसरे गांव का था तो उसने बोला में किसी को यहा जानता भी नहीं हु तो में कहा से इंतजाम करू। उसके युवक के चेहरे पर चिंता कि लकीरें साफ दिख रही थी।

में उनके पास गया और पूछा क्या हुआ तो उन्होंने सारी बात बता दी। और बोला अगर अभी मेरी पत्नी को खून नहीं मिला तो उसको और। बच्चे को कुछ भी हो सकता है।

मैने नर्स से पूछा कि कोनसा ग्रुप है इनकी पत्नी का तो उन्होंने b+  बताया तो मैने बोला आप मेरा खून चेक कर लो शायद मेरा खून मिल जाए।

अच्छे संस्कार

नर्स मुझे अंदर ले गई और मेरा खून चेक किया और मेरा खून b+  निकला तो मै खुश हो गया। और बाहर आकर मैने घर वालो को बता कर उस महिला को खून देने चला गया।

उस महिला ने एक लडकी को जन्म दिया मा और बच्ची दोनो सुरक्षित थी। उस युवक ने मेरा धन्यवाद किया और उसकी बच्ची को मेरे हाथ में लेकर दे दिया। में भी खुश था कि आज मेरा खून किसी कि जिंदगी बचाने के काम आया।

मेरी गोद में बची का अनुभव पाकर में बहुत अच्छा महसूस कर रहा था। तभी मेरे भैया आए मेरे पास और बोले कि छोटे तू बाप बन गया है अपने घर में लक्ष्मी आईं है।

समाज की जिम्मेदारी

में बहुत खुश था। क्युकी आज में जिंदगी का वो खुशनुमा पल था कि में बयान नहीं कर सकता था। आज एक तरफ मैने दो ज़िंदगियों को बचाया तो भगवान ने मेरी झोली में भी एक ज़िन्दगी दे दी।

ये सुनते ही में वहा से सीधा मेरी पत्नी रीना के पास पहुंच गया। और अपनी बच्ची को हाथ में लिया। और ज़िन्दगी का सुखद अनुभव किया। मेरी आंखो में खुशी के आंसू थे जो आज शायद रीना की वजह से थे। में रीना के पास उसका हाथ पकड़ कर बैठा । और जो उसने मुझे आज खुशी दी उसका धन्यवाद किया।

क्युकी आज में बाप बन गया था। मुझे पापा कहने वाली एक परी मेरे घर आ गई थी। और कहते है बेटी उसी घर में पैदा होती है जिसके घर का मुखिया राजा होता है।

शतरंज की अधूरी बाज़ी

आज मेरी बेटी ने मुझे राजा बना दिया था। आज मेरी बेटी 2 साल की हो गई है और इतनी शरारती की उसने सबका दिल जीत लिया। आज भी जब वो मुझे पापा बोलती है तो मुझे वहीं दीन याद आता है जब वो पैदा हुई थी।

तो दोस्तो ये थी आज की कहानी मेरी ओर मेरी बच्ची की दोस्तो अगर आपको ये कहानी पसंद आई हो तो कॉमेंट कर के बताए तो में आगे की कहानी भी जल्दी आप सब के साथ शेयर करूंगा।
धन्यवाद

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तो दोस्तो आप ये कहानियां पढ़िए और कॉमेंट कर के बताइए आपको ये कहानियां कैसी लगी और अपके दोस्तो के साथ भी कहानियां शेयर करे।

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