मौत का हाईवे

नमस्कार दोस्तो,
दोस्तो आज की कहानी एक हाईवे कि कहानी है और  भी उस हाईवे से जाता है वो कभी जिंदा नहीं रहता क्या कारण था कि जो भी जाता लौट के घर तक नहीं पहुंचता तो दोस्तो आज की कहानी शुरू करते हैं।

   मौत का हाईवे

अभी अभी ही काम पूरा हुआ है हाईवे का, और उसपे काम करने वाले मज़दूरों को ठेकेदार उनकी मेहनत का पैसा देने वाला है, इसलिए सभी एक लाइन में लग कर अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं

 इतने दिन काम करने के बाद पैसे मिलेंगे, " इन पैसों से मैं अपने बच्चों के लिए खिलौने खरीदूंगा," मैं तो सारे पैसे बैंक में डाल दूँगा,क्योंकि अगले बरस तो बिटिया के शादी भी करनी है, अभी से पैसे जोड़ूंगा तो उसकी शादी तक अच्छी रक़म हो जाएगी,

फेसबुक पर प्यार

"मैं तो ये पैसा अपनी माँ को दे दूँगा ", " इन पैसों से मैं अपने माता -पिता की आँखों का इलाज़ कराऊंगा "सभी मज़दूर आपस मैं ये सब बात कर रहे थे तभी ठेकेदार आ जाता है और कहता है की - " सभी मज़दूर अपने अंगूठे का निशान लगा कर पैसा ले लें।  

लाइन में लगे मज़दूर अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे है मई की चिलचिलाती धूप भी उनको अभी ठंडक दे रही है क्योकि आज उन्हें अपना मेहनताना मिल रहा है और जिन्हें मिल चूका है उनके चेहरे ख़ुशी से चमक रहे हैं सब पैसे ले कर अपने अपने घर की तरफ़ रवाना होने के लिए बस स्टैंड की तरफ़ जा रहे हैं,

एक लड़की सांवली

 जो की हाईवे से कुछ ही दूर है कुछ मज़दूर सड़क पार कर रहे हैं क हाईवे के उस पर जा कर वो अपने शहर को जाने वाली बस में बैठ सकें के तभी अचानक से एक ट्रक कहाँ से आ कर, सड़क पार कर रहे मज़दूरों को रौंदते हुए आगे निकल जाती है ट्रक की स्पीड और इस घटना का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है की मज़दूरों के शरीर कई फ़ीट तक हवा में उछलने क बाद ज़मीन पर गिरे थे और कुछ इस तरह टक्कर हुई थ ी
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 उनकी की शकल भी अब पहचान में नहीं आ रही थी। इस घटना के बाद पुलिस को बुलाया गया, पुलिस ने मुआयना किया और ये निष्कर्ष निकाला की ट्रक के स्पीड ज़्यादा होना हादसे की वज़ह थी और लाशों को जिनमे महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे उनको हाईवे की दूसरी तरफ के क़ब्रिस्तान म दफ़ना दिया गया। पर आम लोगो के लिए जो उस हाईवे के कुछ दुरी पर रहते थे ये कोई आम घटना नहीं थी, वे जानते थे की ये उस लड़की का ही श्राप है जिसके मरने के बाद उसे इसी कब्रिस्तान में दफना दिया गया था।  

शहीद की बहादुर बेटी

कुछ साल पहले कृतिका अपने दोस्तों कार्तिक और रोहित के साथ मालविका की बर्थडे पार्टी में शामिल होने शहर गए थे और लौटते वक़्त काफ़ी रात भी हो गयी थी।

और रोहित और कार्तिक ने बहुत ड्रिंक भी किया था जैसे हे वो घर लौट रहे थे उन्होंने एक कच्छ रास्ता देखा और कृतिका ने अपने दोस्तों से कहा के इस रस्ते से चले तो घर जल्दी पहुंच जायेंगे क्योकि मैप पर ऐसा ही दिखा रहा है

 कार्तिक और रोहित तो इसी के इंतज़ार में थे के किसी सुनसान जग़ह पर अपनी हवस पूरी की जाये और उनको नशे में इतना भी ख़याल ना रहा के वो जिसके साथ गलत कर रहे हैं वो उनके दोस्त कृतिका हैवो दोनों अपनी हवस पूरी करने के बाद कृतिका वो वहीं मारने के कोशिश करते है और उसका गला दबा देते है

पापा की नन्ही परी

 कुछ देर बाद जब कृतिका के शरीर में कोई हरकत नहीं हो तो वो उसको मरा हुआ समझ कर गाड़ी में बैठ कर भाग जाते हैं बेचारी कृतिका बदहवास से वहीं पड़ी रहती है और दो दिन बाद कुछ महिलाएं जब उस रास्ते से हो कर गुज़रती हैं तभी उन्हें कृतिका दिखाई देती है,वे दौड़ कर उसके पास जाती हैं उसको होश में लाने के लिए मुँह पर पानी के छींटे मारती है पर कृतिका मरणासन्न हालत में बोलती है की - " इस रस्ते से जो भी गुज़रेगा वो ज़िंदा नहीं बचेगा ये मेरा श्राप है " इतना कहते हे व मर जाती है, और गांव के लोग उसको सड़क के पास के कब्रिस्तान में गाड़ देते हैं।  

अभी का समय सरकार ने सभी मज़दूरों के लिए मुआवज़े का ऐलान किया है और हाईवे के उद्घाटन की तारीख़ भी सूचित कर दिया है। तय दिन मंत्री जी के उद्घाटन के बाद गाड़ियों का आवागमन भी शुरू हो जाता है है, पर उस श्राप वाली जग़ह पहुंचते ही ना जाने कैसे गाड़ियों का एक्सीडेंट हो जाता है इतने सारे एक्सीडेंट्स की वजह से सरकार उस हाईवे को बंद करने का ऐलान करती है

हवस वाला प्यार

अब उस हाईवे से कोई नहीं आता जाता, वो अब सुनसान है।
तो दोस्तो कैसी लगी आज कि कहानी अच्छी लगी हो तो जरुर शेयर करे ओर फॉलो करे।

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