मौत का रहस्य एक सच्ची घटना

नमस्कार दोस्तो,
ये कहानी एक रहस्य कहानी है और एक रियल घटना है ये कहानी जर्मनी के एक परिवार कि कहानी है जिनके घर में कुछ ऐशा घटित हुआ कि लोग दहसत में आ गए । दोस्तो तो आज की कहानी शुरू करते है।

मौत का रहस्य एक सच्ची घटना

एक ऐसी मर्डर मिस्ट्री जो आज भी पुलिस अकादमी के अपराधिक जाँच करने वाले छात्रों के लिए कौतुहल का विषय है।


ये 1922 में मार्च का महीना था,जर्मनी के म्युनिक से 70 किलोमीटर दूर बावीरियन इलाके में एक फार्महाउस पर 63 वर्षीय किसान  एंड्रियास ग्रूबर ने रात  के वक़्त अपने मकान के पीछे किसी के पैरों की आहट सुनी,उसने अपनी सोती हुई पत्नी काज़िला (72)को जगा कर ये बात बताई,वो ध्यान से सुनने लगी लेकिन उसे कोई आवाज़ नहीं आई,

फेसबुक पर प्यार फांसी

इतने में दूसरे कमरे से जोसफ़ (2 ),जो उनकी विधवा बेटी विक्टोरिया का बेटा था,उसके रोने की आवाज़ आई तो काज़िला ने अपने पति को चुपचाप सोने के लिए कहा,क्योंकि उनकी बातों से बच्चे उठ गए थे और वैसे भी विक्टोरिया की बेटी काज़ीलिया (7 )को सुबह जल्दी स्कूल जाना था, काज़िला  की बात मानकर एंड्रियास चुपचाप सो गया। 

अगले दिन सुबह  एंड्रियास ने अपने घर के बाहर एक अखबार पड़ा देखा जो उनका नहीं था और किसी और भाषा में था। उसने आस पास पड़ोसियों से पूछा लेकिन वो अखबार उनमे से किसी का भी नहीं था,

 

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;एंड्रियास हैरान था, तभी उसकी नज़र अपने मकान के पीछे बर्फ में बने पैरों के निशान पर गई,मकान के पीछे कोई नहीं जाता था क्योंकि वहाँ कँटीली झाड़ियाँ थीं,उसने घर में सबसे पूछा लेकिन सबने कहा के वो मकान के पिछले भाग में नहीं गए थे ,तभी उनकी नौकरानी बोली कि इस घर में जरूर किसी आत्मा का साया है तभी रात को अजीव अजीब सी आवाज़ें आती हैं और वो डर के मारे काम छोड़ कर चली गई।

मौत का हाईवे

कुछ दिन बाद उनके घर की चाबियाँ खो गई ,अब घर में नौकरानी तो थी नहीं तो किस पर शक करते इसलिए उन्होंने पुलिस में कोई रिपोर्ट नहीं लिखवाई। शुक्रवार  31 मार्च को एंड्रियास परिवार ने एक नई नौकरानी मारिया बॉमगार्टनर (44 )को काम पर रखा।

सोमवार को जब डाकिया डाक डालने आया तो उसने देखा कि शनिवार को डाली गई डाक दरवाजे के सामने वैसी की वैसी पड़ी है,उसने पड़ोसियों से पूछा तो उन्होंने बताया के उन्होंने भी कई दिन से एंड्रियास के परिवार में से किसी को बाहर निकलते नहीं देखा और तो और विक्टोरिया की बेटी काज़ीलिया को भी स्कूल जाते नहीं देखा और न ही जोसफ़ को बाहर खेलते देखा। डाकिये और पड़ोसियों को कुछ शक हुआ और उन्होंने पुलिस को इत्तला कर दी।

म्युनिक पुलिस विभाग के इंस्पेक्टर जॉर्ज अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे और उन्होंने घर के साथ बने बाड़े में एंड्रियास उसकी पत्नी काज़िला,उनकी बेटी विक्टोरिया और विक्टोरिया की बेटी काज़ीलिया को मरा पाया,पुलिस को लगा के ये नौकरानी का काम है।

एक लड़की सांवली

 लेकिन इंस्पेक्टर जॉर्ज अपनी टीम के साथ जैसे ही घर के अंदर घुसे तो लाश की बदबू आने लगी ,उन्होंने देखा कि नई नौकरानी अपने कमरे में मरी पड़ी है,पुलिस को ये देख कर हैरानी हुई कि अपराधियों ने छोटे से मासूम बच्चे जोसफ़ ,जो अपनी माँ की खाट (बेड़ )पर सोया हुआ था, को भी नहीं छोड़ा और उसे भी मौत के घाट उतार दिया।

 पुलिस ने लाशों को शिनाख्त के लिए भेज दिया। जाँच में पता चला की विक्टोरिया की बेटी काज़ीलिया  हमले के काफी समय बाद तक ज़िंदा थी उसके बाल पकड़ कर उसे घसीटा गया था इस वजह से उसके कई जगह से बाल उखड गए थे।

इन सब को किसी धारदार हथियार शायद कुदाल से मारा गया था,लेकिन पुलिस को कुदाल या कोई नुकीला हथियार बरामद नहीं हुआ। एंड्रियास का कोई पास का सम्बन्धी नहीं था और ना ही उनके घर ज्यादा किसी का आना जाना था इसलिए पुलिस ह्त्या का कारण तलाश कर रही थी।

शहीद की बहादुर बेटी

 जर्मनी का ये एक बड़ा भयानक हत्याकाण्ड था। इसलिए पुलिस जल्द से जल्द अपराधियों तक पहुँचना चाहती थी। पुलिस ने 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की लेकिन कोई सबूत हाथ नहीं लगा।

ह्त्या का कारण सबसे पहले पुलिस को डकैती लगा,ऐसा लगता था कि अपराधी कई दिनों से फार्म हाउस के इर्द-गिर्द चक्कर लगा रहा होगा और एंड्रियास और उसके परिवार की दिनचर्या देख रहा होगा।

 और मौका मिलते ही उसने वारदात को अंजाम दे दिया,लेकिन घर की तलाशी में पुलिस को काफी पैसे मिले जिन्हें छेड़ा नहीं गया था,तब पुलिस को हत्या की वजह डकैती नहीं लगी।

  हत्या ऐसे की गई थी जैसे किसी की एंड्रियास और उसके परिवार से दुश्मनी हो ,शक की सुई विक्टोरिया के मरे हुए पति पर भी उठ रही थी क्योंकि विक्टोरिया का पति कार्ल गेब्रियल जो फ़ौज़ में था और उसकी मौत की पुष्टि तो हुई थी।

पापा की नन्ही परी

 लेकिन उसकी लाश कभी बरामद नहीं हुई ,वैसे भी एंड्रियास के पड़ोसियों का कहना था कि एंड्रियास की मौत के बाद उन्होंने उसके घर में किसी की छाया देखी थी और चिमनी से धुआँ निकलते देखा था। पुलिस ने जाँच की लेकिन कुछ भी पता नहीं चला।

इस केस की ख़ास बात ये है कि इसकी फाइल आज तक बंद नहीं हुई है और वक़्त -वक़्त पर नए सिरे से इसकी जाँच होती रहती है।

आज भी कई अपराधिक जाँच करने वाले छात्र इस केस की जाँच करना पसन्द करते हैं ,हालाँकि इतने वक़्त बाद सबूत ढूँढना मुश्किल होता है लेकिन फिर भी छात्रों के लिए ये केस कौतुहल का विषय है।

एंड्रियास के फार्महाउस को अब एक समाधि स्थल बना दिया गया है।

दोस्त ये कहानी एक रियल स्टोरी है ऐसी बहुत 

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