मंजूर न था किस्मत को

नमस्कार दोस्तो, 
दोस्तो हर किसी ने प्यार तो क्या ही होगा पर हर एक कि किस्मत अच्छी नहीं होती क्युकी किसी को प्यार मिल जाता है ओर किसी का बिछड़ जाता है पर दोस्त पाने का मतलब ही प्यार नहीं होता बल्कि अपना प्यार जहा है वह खुश रहे वो भी प्यार नहीं होता ओर आज कल ज्यादा प्रेम कहानियां ऐसी ही होती है तो चलो दोस्तो शुरू करते है आज की प्रेम कहानी 

मंजूर न था किस्मत को


मैं जब पांचवी क्लास में था तो उस लड़की से पहली बार मिला , अपने नए स्कूल में। उसका नाम सोनी है। हम एक ही जगह पर रहते थे। साथ आना-जाना तो होता ही था , हम पढ़ते भी एक ही क्लास में थे। 

शुरुआत में तो वह सिर्फ मेरे लिए एक कॉम्प्टीटर थी , लेकिन जैसे ही हम हाइयर क्लास में गए धीरे-धीरे मैं उसकी ओर आकर्षित होने लगा। जब मैं 9वीं क्लास में था तो मेरे दोस्तों को इसकी भनक लग गई और यकीनन उसे भी इस बात का एहसास अच्छी तरह से हो गया। उसकी एक खास दोस्त ने मुझे बताया कि वह भी मुझे लाइक करती है , लेकिन ना तो मैंने उसको कभी प्रपोज़ किया और ना ही उसने कभी कुछ कहा।

नाम का डॉक्टर

कुछ ऐसे ही पसोपोश में हमने अपनी ग्रैजुएशन पूरी कर ली। हम एक-दूसरे की फीलिंग्स जानते थे , लेकिन हमने कभी एक-दूसके से कुछ नहीं कहा। फिर मैं अपने बेहतर करियर की तलाश में विदेश चला आया। उसके बाद मुझे लगा कि उसे सब बताने का यही सही वक्त है। मैंने फोन पर उसे प्रपोज़ किया और उसने बस इतना ही कहा कि कितनी देर कर दी। हम धीरे-धीरे इस राह पर आगे बढ़ने लगे।

नन्हा किरायदार

लेकिन कहते हैं न कि हर इंसान को वह सब नहीं मिलता जो वह चाहता है। बस , हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उसके माता-पिता नहीं चाहते थे कि हम शादी करें। मजबूरी में आज हम एक-दूसरे से अलग हैं , फिर भी हमें एक-दूजे से प्यार है। सच ही तो है , प्यार में पाना ही सबकुछ नहीं होता , कभी-कभी कुछ खोना भी पड़ता है।

" ना था मंज़ूर किस्मत को , ना थी मर्जी बहारों की
नहीं तो इस गुलिस्तां में , कमी थी क्या नज़ारों की " ।

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